
दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए? ये सवाल सभी के मन में आता है मगर सही जवाब नहीं मिल पाता है। दरअसल दिवाली के पाँच दिनों में दीयों की अलग अलग गिनती मानी जाती है। धनतेरस पर 13, छोटी दिवाली पर 14, लक्ष्मी पूजा की रात 21, 51 या 108, गोवर्धन पूजा पर 5, 7 या 11 और भाई दूज पर 5 या 7। यह कोई एक अनिवार्य नियम नहीं है, परिवार और इलाक़े की परंपरा से बदलता है।
दिवाली 2026: तारीख और दीयों की गिनती
| दिन | तारीख | दीये | ख़ास जगह |
|---|---|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर, शुक्रवार | 13 | यम दीपक दक्षिण की ओर, घर के बाहर |
| छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) | 7 नवंबर, शनिवार | 14 | मुख्य द्वार पर 2, पूजा स्थान पर 1 |
| दिवाली (लक्ष्मी पूजा) | 8 नवंबर, रविवार | 21, 51, 101 या 108 | पहला दीया लक्ष्मी और गणेश जी के सामने |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर, मंगलवार | 5, 7 या 11 | तुलसी, गोशाला, आँगन |
| भाई दूज | 11 नवंबर, बुधवार | 5 या 7 | देहरी पर, तिलक के समय |
कुछ तिथियाँ दो दिन में बँटी हैं। चतुर्दशी 7 नवंबर को लगकर 8 नवंबर की सुबह तक रहती है, इसलिए छोटी दिवाली के दीये 7 नवंबर की शाम को जलते हैं और नरक चतुर्दशी का सुबह का स्नान 8 नवंबर को आता है। गोवर्धन पूजा ज़्यादातर पंचांगों में 10 नवंबर को है, कुछ में 9 नवंबर। अपने शहर का पंचांग देख लें।
धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए?
धनतेरस पर 13 दीये जलाने की मान्यता है। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है और त्रयोदशी का मतलब 13। कुछ जगहों पर इसके दोगुने, यानी 26 दीये भी जलाए जाते हैं।
- 1 बड़ा चौमुखी यम दीपक, घर के बाहर दक्षिण दिशा में
- बाकी 12 दीये मुख्य द्वार, पूजा स्थान, तुलसी, रसोई के पास, तिजोरी या अलमारी के पास, छत की मुँडेर और आँगन में
यम दीपक में सरसों का तेल डाला जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार अकाल मृत्यु के भय से बचा रहता है।
छोटी दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए?
छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) पर 14 दीये जलाने की सबसे ज़्यादा मान्यता है। यह चतुर्दशी तिथि है और चतुर्दशी का मतलब 14। कई घरों में 5, 7 या 11 दीये भी जलते हैं।
दिवाली पर 14 दीये क्यों जलाते हैं, इसके पीछे अलग अलग मान्यताएँ बताई जाती हैं:
- हिंदू मान्यता में 14 लोक माने गए हैं, और हर लोक में रोशनी पहुँचाने की भावना से 14 दीये जलाए जाते हैं
- कुछ लोग इसे श्रीराम के 14 साल के वनवास से जोड़ते हैं
- दीये के उजाले को अँधेरे और नकारात्मकता के जाने का प्रतीक माना जाता है
14 दीये रखने का आसान क्रम:
- मुख्य द्वार पर 2
- पूजा स्थान पर 1
- बाकी 11 रसोई के पास (गैस से दूर), तुलसी, छत की मुँडेर, आँगन और घर के अँधेरे कोनों में
कई घरों में पहला दीया आटे का बनाकर चौमुखी बाती के साथ जलाया जाता है, इसे यम दीपक कहते हैं। माँ काली, श्रीकृष्ण और माँ अन्नपूर्णा के नाम से दीया जलाना और पीपल के पेड़ के नीचे दीया रखना भी शुभ माना जाता है।
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दिवाली की रात कितने दीये जलाने चाहिए?
दिवाली की रात कम से कम 21 दीये जलाना शुभ माना जाता है। श्रद्धा और सुविधा से लोग 51, 101 या 108 दीये भी जलाते हैं।
- सबसे पहला दीया लक्ष्मी और गणेश जी के सामने, घी का बड़ा चौमुखी दीया
- बाकी दीये घी या सरसों के तेल के
- मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई के पास, छत की मुँडेर, आँगन और घर के हर अँधेरे कोने में दीये रखें
- कई घरों में पूरी रात एक अखंड दीया जलता रखते हैं
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दिवाली पर 21 दीये क्यों जलाते हैं?
21 दीये एक आम परंपरागत संख्या है, जिसे कम से कम माना जाता है। इसके पीछे कोई एक तय कारण नहीं मिलता। यह ज़रूरी भी नहीं है, अपनी सुविधा से 11 या 5 दीये भी जला सकते हैं।
क्या दिवाली पर 108 दीये जलाना ज़रूरी है?
नहीं। 108 दीये श्रद्धा से कुछ लोग जलाते हैं, क्योंकि 108 की संख्या पवित्र मानी जाती है। यह नियम नहीं है। जितने दीये आराम से और सुरक्षित रखे जा सकें, उतने काफ़ी हैं।
गोवर्धन पूजा पर कितने दीये जलाने चाहिए?
गोवर्धन पूजा पर 5, 7 या 11 दीये जलाने की मान्यता है। इस दिन अन्न और प्रकृति को धन्यवाद देने की भावना रहती है।
- 1 दीया तुलसी के पास
- 1 दीया गोशाला या गोवर्धन की आकृति के पास
- बाकी आँगन और रसोई के पास
भाई दूज पर कितने दीये जलाने चाहिए?
भाई दूज पर 5 या 7 दीये जलाने की मान्यता है। एक दीया देहरी या मुख्य द्वार पर यमराज और चित्रगुप्त के नाम से रखा जाता है। भाई की लंबी उम्र की कामना से तिलक के समय भी एक दीया जलाते हैं।
यम का दीपक कब और किस दिशा में जलाएँ?
यम का दीपक शाम को सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। परंपरा धनतेरस के साथ छोटी दिवाली पर भी मिलती है, पर अलग इलाक़ों में अलग हो सकती है। दिल्ली में इस साल प्रदोष काल शाम 5:32 से 8:09 बजे तक है। आपके शहर में कुछ मिनट का फ़र्क होगा, इसलिए पंचांग देख लें।
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त इससे अलग है। दिल्ली में धनतेरस की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है।
लक्ष्मी जी के सामने कौन सा दीया जलाएँ?
पूजा में लक्ष्मी और गणेश जी के सामने घी का दीया जलाने की परंपरा है। यम दीपक, मुख्य द्वार और बाहर के दीयों में सरसों का तेल इस्तेमाल होता है। सरसों के तेल के दीये को शनि से जोड़ना भी एक धार्मिक मान्यता है।
क्या घी और तेल दोनों के दीये जला सकते हैं?
हाँ। घी का दीया पूजा स्थान के लिए और सरसों के तेल का दीया यम दीपक और बाहर के लिए, ऐसा बहुत से घरों में होता है। जो आसानी से मिले, वह इस्तेमाल करें। इसमें कोई कड़ा नियम नहीं है। यम दीपक में चौमुखी बाती और बाकी दीयों में रुई की लंबी बाती लगाई जाती है।
दीये कम हों तो क्या करें?
दीये कम हों तो भी पूजा पूरी मानी जाती है। गिनती से ज़्यादा यह बात मायने रखती है कि पहला दीया सही जगह जले और घर का कोई कोना अँधेरा न रहे। अगर आपके परिवार की अपनी गिनती चली आ रही है, तो वही रखें।
दीये रखते समय बरतें सावधानी
दीये पर्दे, कागज़, सजावट और ज्वलनशील चीज़ों से दूर रखें। बच्चों की पहुँच से दूर रखें। अखंड दीया जलाएँ तो उसे बिना देखभाल के न छोड़ें। मुख्य द्वार, तुलसी, आँगन और छत की मुँडेर सुरक्षित जगहें हैं।
अस्वीकरण
इस लेख में दी गई दीयों की संख्या, दिशा और पूजा से जुड़ी जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पारिवारिक एवं क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार इनमें अंतर हो सकता है। इसे किसी अनिवार्य धार्मिक नियम के रूप में न लें। पूजा के लिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग का पालन करें।
