
सावन मास में भगवान शिव की भक्ति अपने चरम पर होती है। खासकर सावन की शिवरात्रि—जो हर वर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है—उसका धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व बेहद अधिक है। शिव महापुराण में इसका व्यापक वर्णन है कि इस दिन पार्थिव शिवलिंग की साधना करने से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और उनके सभी पापों का नाश होता है। लेकिन विद्वानों का मार्गदर्शन यही है कि इस पूजा में कुछ अनिवार्य नियमों का पालन होना अनिवार्य है, अन्यथा शिव कृपा कम हो सकती है।

🗓️ सावन की शिवरात्रि 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
2025 में सावन की शिवरात्रि इस प्रकार निर्धारित है:
- 📅 तिथि: बुधवार, 23 जुलाई 2025
- 🕰️ चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 23 जुलाई सुबह 4:39 बजे
- 🕰️ चतुर्दशी समाप्त: 24 जुलाई दोपहर 2:28 बजे तक
- 🌙 निशीथा काल (मध्य रात): 24 जुलाई रात्रि 12:07 से 12:48 तक
इस मुहूर्त में की गई पूजा को अधिक फलदायी माना गया है।

📜 शिव महापुराण में पार्थिव शिवलिंग की महिमा
शिव महापुराण की कोटिरुद्र संहिता में स्पष्ट रूप से कहा गया है:
“पार्थिवं लिङ्गमासाद्य यः करोति महेश्वरम्।
स जीवन्मुक्तिमाप्नोति शिवलोकं स गच्छति॥”
अर्थात जो भक्त मिट्टी से शिवलिंग बनाकर विधिपूर्वक पूजा करता है, वह शिवलोक को प्राप्त होता है।
शिव पुराण में भी पार्थिव लिंग की महिमा का वर्णन मिलता है:
- यह पूजा मितव्ययी नहीं, बल्कि कम प्रयास में अधिक फलदायक है।
- सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग पूजन करने वाले (जैसे मैथिल समुदाय में) के उल्लेख भी विद्यमान हैं। WikipediaIndiatimes

🪔 पार्थिव शिवलिंग — यह क्या है?
पार्थिव का अर्थ है – “पृथ्वी से बना हुआ”। पार्थिव शिवलिंग मिट्टी, गोमय या गंगामिट्टी से हाथों से बनाकर भगवान शिव की भक्ति-अभिव्यक्ति होती है। आमतौर पर इसका आकार मुठ्ठी या अंगूठे जितना बनाते हैं।
यह आध्यात्मिक रूप से अत्यधिक शक्तिशाली साधन है क्योंकि:
- कर्मों का तनाव कम करता है
- भव बंध से मुक्ति दिलाता है
- ग्रह दोष, कष्ट, वंश दोष आदि नष्ट करता है

⚠️ सावन की शिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग पूजन की सावधानियाँ
सावन की शिवरात्रि में पूजा को फलदायक बनाना है तो सावधानियाँ बहुत जरूरी हैं:
- ✳️ मिट्टी (शुद्धता) – गंगा या पवित्र स्थान की मिट्टी चुनें। कांटेदार या गंदी मिट्टी न लें।
- ✳️ शिवलिंग का आकार – बहुत बड़ा या असमान आकार न बनाएं; छोटा ही ठीक।
- ✳️ स्थापना स्थल – शिवलिंग को मिट्टी में सीधे न रखें। पीतल या तांबे की थाली अथवा साफ आसन आवश्यक।
- ✳️ दोबारा प्रयोग न करें – पूजन के बाद नियमित रूप से विसर्जन करें।
- ✳️ भस्म और तुलसी तो वर्जन – पूजन में तुलसी, हल्दी, सिंदूर, केतकी फूल अपमित्र माने जाते हैं ।
- ✳️ पूजा पूरी विधि से करें – अधूरा पूजन फलदायी नहीं होता।

🧘♀️ सावन की शिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग पूजन विधि
1. पूर्व तैयारी
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और व्रत संकल्प।
- पवित्र स्थान पर मिट्टी शुद्ध करें – दीप जलाएं, शंख बजाएं।
2. पार्थिव शिवलिंग बनाना
- हाथों से मिट्टी का अंगूठे जितना शिवलिंग बनाएं।
- मंत्र बोलते हुए बनाएं: “ॐ नमः शिवाय” बार-बार।
3. स्थापना एवं अभिषेक
- थाली में स्थापित करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक।
- इसके बाद गंगाजल से स्नान।
4. पूजन सामग्री अर्पण
- बिल्वपत्र, आक, धतूरा, सफेद फूल, अक्षत, चंदन, कपूर, धूप-दीप अर्पित करें।
5. मंत्र जाप
- ॐ नमः शिवाय — 108 बार
- महामृत्युंजय मंत्र — 11 या 21 बार ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…
- विशिष्ट स्तुति मंत्र: “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्…” (सुबह–रात्रि चाहे कहीं भी)
6. रात्रि जागरण एवं कथा
- 밤 12 बजे से जागरण और भजन–कीर्तन
- शिव महापुराण/नारद पुराण कथा का पाठ दें।
7. अंतिम आरती और विसर्जन
- सुबह उठकर गंगा जल में विसर्जित करें, या फिर तुलसी/पीपल के नीचे गढ़कर जलाधार।

✨ इस दिशा में करें पूजन
❗ यदि आप सावन शिवरात्रि पर घर में ही पूजन कर रहे हैं, तो घर का उत्तर-पूर्व कोण (ईशान कोण) सबसे उत्तम होता है। वहीं पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करें।

🕉️ सावन की शिवरात्रि में मंत्रों का महत्व
- ॐ नमः शिवाय: मूल मंत्र; आत्मा को शांत व शिवलिंग से जोड़ने वाला।
- महामृत्युंजय मंत्र: रोग, मृत्यु से रक्षा, जीवन शक्ति।
- विशिष्ट स्तुति (“श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्…”) – पार्थिव लिंग पूजन के समय प्रभावी।
- रुद्राष्टकम या शिवाष्टकम – शक्तिशाली स्तोत्र हैं।

🌟 पार्थिव शिवलिंग पूजन के लाभ
- आत्मिक उन्नति — भवसागर से उभरने का माध्यम।
- थोक–थोक पापों से मुक्ति — जैसे स्नान से होता है।
- ग्रह दोष शांति — विशेष रूप से राहु–केतु–शनि दोषों में लाभ।
- वैवाहिक, संतान सुख — पारिवारिक समस्याओं का समाधान।
- शारीरिक स्वास्थ्य — रोग निवारण और मानसिक शांति।
- शिव जी की कृपा — भक्त पर विशेष शिक्षाएं आती हैं।

💫 सावन की शिवरात्रि के लाभ:
लाभ | विवरण |
---|---|
पापों का नाश | सभी कर्मजन्य पाप समाप्त होते हैं। |
विवाह में सफलता | विवाह संबंधित रुकावटें दूर होती हैं। |
मानसिक शांति | “ॐ नमः शिवाय” का जाप मानसिक संतुलन देता है। |
स्वास्थ्य लाभ | व्रत और रुद्राभिषेक से रोग निवारण होता है। |
कार्य सिद्धि | रुके कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। |

📘 शिव महापुराण की कथाएँ
शिव महापुराण में कई प्रेरक कथाएँ हैं:
कोटि शिल्प – एक समुदाय ने एक साथ सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग एक दिन में बनाया था!
रावण, संत पृथु, कुम्भकर्ण – सभी ने पार्थिव शिवलिंग पूजन के बाद शिव की कृपा पाई।
रामायण – लंका प्रवेश से पहले भगवान राम ने समुद्रतट पर पार्थिव शिवलिंग पूजा की ।

🔍 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सावन की शिवरात्रि कब है 2025 में?
- 23 जुलाई 2025, बुधवार
- पार्थिव शिवलिंग क्या होता है?
- मिट्टी से हाथों से बनाया गया शिवलिंग, जो विशेष पूजन हेतु होता है।
- पार्थिव शिवलिंग घर में रखें अथवा विसर्जित करें?
- पूजा के बाद पवित्र जल में विसर्जित करना जरूरी है।
- इस दिन कौन से मंत्र सबसे प्रभावी हैं?
- “ॐ नमः शिवाय”, महामृत्युंजय मंत्र, “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्”।
- क्या स्त्रियाँ पार्थिव शिवलिंग बना सकती हैं?
- हाँ, समझदारी से और शुद्ध मन से कर सकती हैं।
- क्या सावन की शिवरात्रि पर व्रत रखना आवश्यक है?
- नहीं, लेकिन व्रत का रखन प्रभाव को बढ़ाता है।
- क्या रात जागरण करना जरूरी है?
- हाँ, यह परम पुण्य फल देता है।
- क्या पूजन के बाद काला तिल चढ़ा सकते हैं?
- काले तिल को अक्सर शनि दोष समापन हेतु चढ़ाते हैं।
- पूजन में तुलसी क्यों नहीं अर्पित?
- शिवजी तुलसी के प्रिय नहीं होते, इसलिए सावधानी रखें ।
- क्या पार्थिव लिंग पूजा से ग्रह दोष दूर होते हैं?
- हाँ, ग्रह दोष उपकरण विषेश फल प्राप्त होता है।

🎯 निष्कर्ष
सावन की शिवरात्रि (23 जुलाई 2025) पर पार्थिव शिवलिंग पूजन एक सरल परंतु शक्तिशाली साधना है। शिव महापुराण में इसकी महिमा स्पष्ट है—यह पूजा बहुआयामी फ़ायदे लाती है: आत्मिक विकास, मानसिक शांति, कष्टों से मुक्ति, और जीवन की समृद्धि। इसे करने से पूर्व सरल नियमों का पालन, विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप, रात्रि जागरण और जल विसर्जन अत्यंत जरूरी हैं।
इस शिवरात्रि, पूरी श्रद्धा, एकाग्रता और स्वच्छता के साथ यह पूजन करें और अपने जीवन को शिव की कृपा से आलोकित करें।

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जय बाबा विश्वनाथ की, हर हर महादेव