
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी Vinayak Chaturthi (25 सितंबर) नवरात्र के पावन मौके पर आ रही है। इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश जी को चढ़ाई जाने वाली हर चीज के पीछे सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक तर्क और एक सरल नियम भी छुपा है? आज हम आपको बताएंगे पूजा का पूरा पैकेज – क्या चढ़ाएं, क्या न चढ़ाएं और इनके पीछे की दिलचस्प वजह
शुभ मुहूर्त
विनायक चतुर्थी तिथि: 25 सितंबर (शाम 07:06 बजे से) से 26 सितंबर (रात 09:33 बजे तक)।
पूजा का शुभ मुहूर्त: 25 सितंबर, सुबह 11:00 बजे से दोपहर 01:25 बजे तक।

Vinayak Chaturthi : जानिए क्या चढ़ाएं और उसके आश्चर्यजनक फायदे
यहां बताई गई चीजें न सिर्फ गणेश जी को प्रिय हैं, बल्कि सेहत और जीवनशैली के लिए भी फायदेमंद हैं।
1. दूर्वा (दूब घास)
- कैसे चढ़ाएं: 21 हरी-भरी दूर्वा की गांठे बनाकर चढ़ाएं। मंत्र: ‘ओम गण गणपतये नमः ।
- वैज्ञानिक कारण: दूब घास एक शक्तिशाली औषधि है। इसे चबाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है, मुंह के छाले ठीक होते हैं और शरीर में ठंडक बनी रहती है। पूजा के बाद इसे प्रसाद रूप में खाने का यही वैज्ञानिक आधार है।
2. मोदक / गुड़-चना / केला
- कैसे चढ़ाएं: घर का बना साधारण मोदक, गुड़ और चना या केला भोग में रखें।
- वैज्ञानिक कारण: नवरात्र के व्रत के दौरान शरीर को हल्की लेकिन ताकतवर डाइट की जरूरत होती है। गुड़ आयरन और एनर्जी का स्रोत है, चना प्रोटीन से भरपूर है और केला पोटैशियम देता है। यह संयोजन शरीर की ऊर्जा को बनाए रखता है।
3. सिंदूर
- कैसे चढ़ाएं: गणेश जी की मूर्ति पर थोड़ा सा सिंदूर चढ़ाएं।
- वैज्ञानिक/मान्यता आधार: सिंदूर में हल्के मर्क्युरी जैसे तत्व होते हैं, जो एक विशेष ऊर्जा का संचार करते हैं। मान्यता है कि इसे चढ़ाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और घर में सकारात्मकता आती है।

Vinayak Chaturthi पर सरल पूजा विधि
अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो घबराइए नहीं। गणेश जी आसानी से प्रसन्न होने वाले देव हैं।
- सुबह स्नान के बाद एक साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर गणेश जी की एक छोटी सी मूर्ति या तस्वीर रखें।
- उन पर एक बिंदी रोली लगाएं, एक फूल चढ़ाएं और एक दीया जलाएं।
- ऊपर बताई गई चीजों में से जो भी आसानी से उपलब्ध हो (जैसे केला और गुड़, या सिर्फ 21 दूर्वा), वही अर्पित कर दें।
- मंत्र: बस दिल से “ओम गण गणपतये नमः” बोलें। इतने से ही गणपति बप्पा प्रसन्न हो जाएंगे।
Vinayak Chaturthi पर गलती से भी न चढ़ाएं ये 3 चीजें
पूजा का पूरा फल पाने के लिए कुछ चीजों से परहेज जरूरी है।
- तुलसी दल: तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी और गणेश जी में मतभेद हुआ था, इसलिए गणेश पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है।
- लाल फूल: मान्यता है कि लाल फूल मंगल ग्रह से जुड़े हैं, जिनकी गणेश जी से संबंधित केतु ग्रह से शत्रुता मानी जाती है। इसलिए सफेद, पीले या गुलाबी फूल अधिक शुभ रहते हैं।
- केतकी का फूल: केतकी के फूल को भगवान शिव के श्राप के कारण किसी भी पूजा में उपयोग नहीं किया जाता। गणेश जी की पूजा में भी इसे न चढ़ाएं।

Vinayak Chaturthi से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ)
Q1. क्या Vinayak Chaturthi पर व्रत रखना जरूरी है?
A1. व्रत रखना शुभ माना जाता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है। अगर आप व्रत नहीं रख सकते, तो सात्विक भोजन करके साधारण पूजा करने से भी गणेश जी प्रसन्न होते हैं।
Q2. पूजा का प्रसाद कब बांटना चाहिए?
A2. पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद को पहले गणेश जी पर चढ़ाएं, फिर उसे परिवार के सदस्यों और मेहमानों में बांट देना चाहिए।
Q3. अगर दूर्वा (दूब घास) न मिले तो क्या करें?
A3. घबराएं नहीं। गणेश जी को गुड़ और चना या फिर केले का भोग लगाना भी उतना ही शुभ माना जाता है। आप इन चीजों से ही पूजा कर सकते हैं।
Q4. क्या संकटा गणेश चतुर्थी और Vinayak Chaturthi एक ही हैं?
A4. नहीं। Vinayak Chaturthi महीने के शुक्ल पक्ष (चंद्रमा बढ़ते समय) में आती है, जबकि संकटा चतुर्थी कृष्ण पक्ष (चंद्रमा घटते समय) में आती है। दोनों का महत्व अलग-अलग है।
आपसे अनुरोध है
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अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख सामान्य जानकारी और लोकमान्यताओं पर आधारित है। इसमें बताई गई पूजन विधियाँ और सामग्री विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं से ली गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत को करने से पहले अपने कुल परंपरा या किसी विद्वान पंडित/ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें। लेख में दी गई किसी भी जानकारी के उपयोग से होने वाले परिणामों की जिम्मेदारी इस वेबसाइट/लेखक की नहीं होगी। तिथियाँ और मुहूर्त समय और स्थान के अनुसार बदल सकते हैं, अतः सटीक जानकारी के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।

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