
52 शक्तिपीठों के 52 रहस्य : भारतीय संस्कृति और आस्था में माँ शक्ति का स्थान सर्वोपरि है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती के देह त्यागने के बाद उनके शरीर को 52 भागों में काटा, तो जहाँ-जहाँ उनके अंग, आभूषण या वस्त्र के टुकड़े गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ अस्तित्व में आए।
क्या आप जानते हैं भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादश और श्रीलंका में भी स्थित हैं माँ के शक्तिपीठ? अगर नहीं तो यह पोस्ट आपके लिए ही है! नवरात्र के पावन दिनों में इन शक्तिपीठों की महत्ता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यहाँ की गई पूजा और साधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

📜 52 शक्तिपीठों की संपूर्ण सूची
| क्रमांक | शक्तिपीठ (स्थान) | सती का अंग/आभूषण | शक्ति (देवी का नाम) | भैरव (शिव का रूप) | मान्यता / विशेषता |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | कामाख्या (असम, गुवाहाटी) | योनि | कामाख्या | उमानंद | तंत्र साधना का सबसे प्रमुख केंद्र |
| 2 | कांची (तमिलनाडु) | पीठ | कामाक्षी | कंदर्प | विद्या और कला की देवी |
| 3 | ज्वालामुखी (हिमाचल) | जीभ | सिद्दिदा | उन्मत्त भैरव | यहाँ अनंत ज्योतियाँ जलती रहती हैं |
| 4 | हिंगलाज (पाकिस्तान, बलूचिस्तान) | ब्रह्मरंध्र | कोटारी | भैरव | रेगिस्तान का शक्तिपीठ |
| 5 | वैष्णो देवी (जम्मू) | खोपड़ी | महाकाली | त्रिकोटेश्वर | तीन शक्तियों का संगम |
| 6 | शक्तिगढ़ (बंगाल) | दायाँ घुटना | वज्रेश्वरी | चिकुरेश्वर | अनाज की समृद्धि देने वाली |
| 7 | काशी (उत्तर प्रदेश) | कान का कुंडल | विशालाक्षी | कलभैरव | मोक्षदायिनी, विश्वनाथ से जुड़ी |
| 8 | उडियाना (पुरी, ओडिशा) | नाभि | विमला | जगन्नाथ | जगन्नाथ मंदिर परिसर में |
| 9 | पूर्णगिरि (उत्तराखंड) | नाभि | चंद्रिका | विमल भैरव | नवरात्र में विशेष मेले लगते हैं |
| 10 | नैना देवी (हिमाचल) | नेत्र | नैना देवी | कलभैरव | सती के नेत्र यहाँ गिरे थे |
| 11 | कालिका (उज्जैन, म.प्र.) | ऊपरी होंठ | अवंती | महाकाल | सिंहस्थ कुंभ का प्रमुख स्थल |
| 12 | शक्तिपीठ तारा तारिणी (ओडिशा) | स्तन | तारिणी | खड्गेश्वर | बेटी वर्धन के लिए प्रसिद्ध |
| 13 | कुमारी (त्रिपुरा) | दाहिना पैर | त्रिपुरा सुंदरी | त्रिपुरेश | त्रिपुरा की राजधर्म स्थल |
| 14 | विंध्यवासिनी (उत्तर प्रदेश) | दाहिना पैर | विंध्यवासिनी | अवधूत | संतान और शक्ति की दायिनी |
| 15 | कांचीपुरम (तमिलनाडु) | पीठ | कामाक्षी | कुमारन | दक्षिण भारत का शक्ति केंद्र |
| 16 | उज्जैनी (गुजरात, गिरनार) | कान का आभूषण | मंगलचंडी | कपिल | अमंगल नाशिनी |
| 17 | हिंगलाज (सिंध) | कपाल | हिंगलाज माता | भैरव | रेगिस्तान का पवित्र स्थान |
| 18 | सरस्वती शक्तिपीठ (काश्मीर) | हाथ | सरस्वती | शंकर | विद्या और कला की देवी |
| 19 | जया दुर्गा (ओडिशा) | जंघा | जय दुर्गा | शंभु | शक्ति और विजय की देवी |
| 20 | महालक्ष्मी (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) | नेत्र | महालक्ष्मी | कुरुंदर | धन और वैभव की देवी |
| 21 | मीनाक्षी (मदुरै) | हाथ | मीनाक्षी | सुंदरेश्वर | विवाह और सौभाग्य की देवी |
| 22 | कालिका (पावागढ़, गुजरात) | हृदय | कालिका | भैरव | शिखर पर स्थित शक्तिपीठ |
| 23 | चंडी (चंडीगढ़) | कंधा | चंडी | भैरव | नगर का नाम इन्हीं से पड़ा |
| 24 | महाकाली (उज्जैन) | उंगली | महाकाली | महाकाल | अघोर परंपरा का केंद्र |
| 25 | त्रिस्रोतिका (प. बंगाल) | पैर की उँगलियाँ | त्रिस्रोतिका | ईश्वर | तीन नदियों के संगम पर |
| 26 | बिराट (बिहार) | पैर का तलवा | अंबिका | अमृतेश्वर | पैरों के रोग नष्ट होते हैं |
| 27 | श्रीशैल (बांग्लादेश) | ग्रीवा (गर्दन) | जयन्ती / महालक्ष्मी | किरीटाकेश्वर | तांत्रिक साधनाओं का केंद्र |
| 28 | ललिता (काशी) | हाथ का अंगूठा | ललिता | भैरव | काशी के ललिता घाट पर |
| 29 | चंद्रभागा (ओडिशा/झारखंड) | पैर का अंगूठा | चंद्रभागा | चंद्रशेखर | सूर्य-चंद्र ऊर्जा का संगम |
| 30 | जायस (उत्तर प्रदेश) | दाहिना अंगूठा | जयन्ती | भैरव | ऐतिहासिक स्थल |
| 31 | हरसिद्धि (उज्जैन) | हाथ | हरसिद्धि | कपिल | विक्रमादित्य की आराध्या देवी |
| 32 | कटक (ओडिशा) | गला | चंद्रिका | चंद्रेश्वर | रत्नगिरि पर स्थित |
| 33 | जालंधर (पंजाब) | स्तन | त्रिपुरमालिनी | भैरव | शत्रु विजय की दायिनी |
| 34 | रजनी (नेपाल) | घुटना | रजनी | महादेव | काठमांडू के निकट |
| 35 | मणिकर्णिका (काशी) | कान | विशालाक्षी | कालभैरव | मृत्युंजय स्थान |
| 36 | कुरुक्षेत्र (हरियाणा) | टखना | भद्रकाली | रुद्र | महाभारत स्थल |
| 37 | गंगासागर (प. बंगाल) | दाहिना पैर | कपिला देवी | कपिल मुनि | संगम पर स्थित |
| 38 | श्रीशैलम (आंध्र) | गर्दन | ब्रह्मराम्बा | मल्लिकार्जुन | ज्योतिर्लिंग के साथ |
| 39 | वज्रेश्वरी (म.प्र.) | कोहनी | वज्रेश्वरी | वीरभद्र | चमत्कारिक शक्ति |
| 40 | ताम्रलिप्त (प. बंगाल) | पेट | कपिलेश्वरी | भैरव | प्राचीन बंदरगाह नगर |
| 41 | देवगढ़ (झारखंड) | दाहिना हाथ | जया दुर्गा | चंद्रशेखर | रत्नगिरी पर्वत पर |
| 42 | कालिका (द्वारका, गुजरात) | उंगली | कालिका | भैरव | समुद्र किनारे |
| 43 | उच्छिष्ट (गुजरात) | होंठ | उच्छिष्ट चंडिका | महाकाल | तंत्र उपासना स्थल |
| 44 | श्रीहट्ट (बांग्लादेश) | ग्रीवा | महालक्ष्मी | शंकर | प्राचीन शक्ति स्थल |
| 45 | शाकम्भरी (राजस्थान) | चेहरा | शाकम्भरी | भैरव | भोजन और अन्न की देवी |
| 46 | धारी देवी (उत्तराखंड) | सिर | धारी देवी | कालभैरव | देवभूमि का रक्षक शक्तिपीठ |
| 47 | बिराट (बिहार) | तलवा | अम्बिका | अमृतेश्वर | जीवन में स्थिरता |
| 48 | वीरत (बांग्लादेश) | टखना | चंद्रनन्दिनी | वामन | पूर्णिमा पर साधना |
| 49 | विंध्यवासिनी (मिर्जापुर, उ.प्र.) | दाहिना पैर | विंध्यवासिनी | अवधूत | नवरात्र में विशाल मेले |
| 50 | पंचस्तवी (कश्मीर) | बायाँ नेत्र | महामाया | त्रिलोचन | तंत्र साधना का स्थल |
| 51 | ललिता (काशी) | हाथ का अंगूठा | ललिता | भैरव | काशी का ललिता घाट |
| 52 | उज्जयिनी/गिरनार (गुजरात) | कान का आभूषण | मंगलचंडी | कपिल | मंगलदायिनी शक्ति |
नोट : विभिन्न पुराणों और मान्यताओं में शक्तिपीठों की सूची और स्थानों में थोड़े-बहुत अंतर पाए जाते हैं। यह सूची सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत 52 शक्तिपीठों पर आधारित है।

🌺 नवरात्र और शक्तिपीठों का गहरा संबंध
नवरात्रि के नौ दिन सीधे तौर पर माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए समर्पित हैं, जो इन्हीं शक्तिपीठों की अभिव्यक्ति हैं। इस दौरान इन पीठों पर जप, तप और साधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि नवरात्र में इन स्थानों पर की गई साधना से भक्त को अलौकिक शक्तियों और माँ का आशीर्वाद तुरंत प्राप्त होता है।
👉 क्या आपने कभी किसी शक्तिपीठ की यात्रा की है? कमेंट में अपना अनुभव हमारे साथ साझा जरूर करें! अगर नहीं, तो इस नवरात्रि में अपने नज़दीकी देवी मंदिर में “जय माँ शक्ति” का जाप करें और इन शक्तिपीठों का स्मरण करें। अपने घर के नज़दीक के शक्तिपीठ का पता लगाएं और वहाँ जाने की योजना बनाएं।
📌 कॉल टू एक्शन (Call to Action)
🌸 अगर आप भी माँ शक्ति के भक्त हैं और यह जानकारी आपको उपयोगी लगी है, तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार के साथ ज़रूर शेयर करें। सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
🙏 माँ शक्ति का आशीर्वाद सब पर बना रहे।

🔍 नवरात्र और शक्तिपीठ से जुड़े लोकप्रिय प्रश्न (FAQs)
1. शक्तिपीठ कितने हैं और कहाँ-कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: मुख्य रूप से शक्तिपीठों की संख्या 51 या 52 मानी जाती है। ये ज्यादातर भारत में स्थित हैं, लेकिन कुछ पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और तिब्बत में भी हैं।
2. 52 शक्तिपीठ और 51 शक्तिपीठ में क्या अंतर है?
उत्तर: अलग-अलग पुराणों और ग्रंथों में अलग-अलग संख्या का उल्लेख मिलता है। कालिका पुराण में 4 मुख्य पीठों का जिक्र है, जबकि देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 पीठ बताए गए हैं। 51 और 52 की संख्या सबसे प्रचलित है, जहाँ 52वें पीठ को कभी-कभी शक्ति के ‘मन’ या आभूषण के गिरने का स्थान माना जाता है।
3. नवरात्र में शक्तिपीठों की यात्रा क्यों विशेष मानी जाती है?
उत्तर: नवरात्रि देवी की उपासना का सबसे शुभ समय माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान इन पीठों पर स्थित ऊर्जा केंद्र सबसे सक्रिय होते हैं और यहाँ की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
4. क्या विदेशों में भी शक्तिपीठ स्थित हैं?
उत्तर: हाँ, कुछ शक्तिपीठ वर्तमान भारत की सीमाओं के बाहर स्थित हैं। जैसे:
- हिंगलाज माता मंदिर (पाकिस्तान)
- सुगंधा शक्तिपीठ (बांग्लादेश)
- लंका शक्तिपीठ (श्रीलंका)
- मानस शक्तिपीठ (तिब्बत)
5. कामाख्या शक्तिपीठ की खासियत क्या है?
उत्तर: असम स्थित कामाख्या मंदिर सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माँ सती की योनि गिरी थी। यह तांत्रिक साधना का सर्वोच्च केंद्र है। यहाँ प्रतिवर्ष होने वाले ‘अम्बुबाची मेले’ के दौरान माँ कामाख्या रजस्वला होती हैं, जो इस पीठ की अद्वितीय मान्यता है।
6. काशी (वाराणसी) में शक्तिपीठ कौन सी है?
उत्तर: काशी में विशालाक्षी/अन्नपूर्णा शक्तिपीठ स्थित है, जहाँ माँ सती के कान का कुंडल गिरा था। इसके भैरव कालभैरव हैं।
7. नवरात्र में शक्तिपीठों का ध्यान करने का क्या महत्व है?
उत्तर: मान्यता है कि नवरात्र में इन पीठों का ध्यान करने से, उनकी यात्रा के समान ही पुण्यफल की प्राप्ति होती है। इससे भक्त को माँ की कृपा और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
8. सबसे दुर्गम शक्तिपीठ कौन सी मानी जाती है?
उत्तर: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के रेगिस्तान में स्थित हिंगलाज माता मंदिर की यात्रा सबसे दुर्गम मानी जाती है।
9. क्या शक्तिपीठों की यात्रा से पाप कटते हैं?
उत्तर: आस्था के अनुसार, इन पवित्र तीर्थस्थलों की यात्रा और दर्शन से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग सुगम होता है।
10. नवरात्र में कौन से शक्तिपीठ सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: नवरात्र में वैष्णो देवी (जम्मू), कामाख्या (असम), ज्वालामुखी (हिमाचल), कालीघाट (कोलकाता) और विन्द्यवासिनी (उत्तर प्रदेश) जैसे पीठों पर भक्तों की सबसे भारी भीड़ होती है।
⚖️ डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल आस्था, ऐतिहासिक मान्यता और सांस्कृतिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यहाँ दी गई जानकारी पौराणिक ग्रंथों (जैसे देवी भागवत पुराण, कालिका पुराण) और लोक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न स्रोतों में शक्तिपीठों की संख्या और स्थान में थोड़ा बहुत अंतर पाया जा सकता है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। किसी भी तीर्थयात्रा पर जाने से पहले स्थानीय मौसम और यात्रा सलाह जरूर लें।

Numhoros Editorial Team अनुभवी ज्योतिषियों, लेखकों और अंक शास्त्रियों का समूह है। हमारा उद्देश्य वैदिक ज्योतिष और आधुनिक गणनाओं पर आधारित शैक्षिक और सूचनात्मक (Educational & Informational) विश्लेषण प्रस्तुत करना है।”

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